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Monday, July 19, 2010

मोबाइल पर डाउनलोड करें काम के ऐप्लिकेशन
मोबाइल फोन में अब कैमरा, रेडियो, टच-स्क्रीन जैसे फीचर आम हो गए हैं। अब जमाना ऐप्लिकेशंस का है, जिनके द
म पर आपका हैंडसेट किसी कंप्यूटर से कम नहीं रहता। मोबाइल में क्या है ऐप्लिकेशन का फंडा, बता रहे हैं आशीष पांडे :
अब फोन के शरीर से ज्यादा उसकी आत्मा अहम हो गई है। आत्मा यानी उसका ऑपरेटिंग सिस्टम, जिस पर फोन ऑपरेट करता है। जैसे आपका पीसी विंडोज एक्सपी, विडोंज 7 या लाइनक्स पर चलता है, उसी तरह फोन का भी ओएस होता है। अगर फोन स्मार्ट है तो उसमें आपको थर्ड पार्टी ऐप्लिकेशन जोड़ने की सुविधा भी मिलेगी। थर्ड पार्टी ऐप्लिकेशन यानी ऐसे फीचर, जो मोबाइल कंपनी ने नहीं बल्कि डिवेलपर्स ने आपके फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बनाए हैं और जिन्हें आप अपने फोन पर डाउनलोड कर सकते हैं। इन ऐप्लिकेशन में गेम्स से लेकर आपके फाइनैंशल, हेल्थ और पर्सनल प्लैनर तक शामिल हैं। ऐप्लिकेशंस को सबसे पहले एपल ने आईफोन में पेश किया था। आज एपल के एप स्टोर में करीब सवा दो लाख ऐप्लिकेशन हैं, जहां अब तक पांच अरब से ज्यादा डाउनलोड दर्ज हो चुके हैं। दूसरे नंबर पर गूगल का एंड्रॉयड एप स्टोर है, जहां करीब 70 हजार एप्स हैं। इनके अलावा, नोकिया का सिंबियन, विंडोज, ब्लैकबेरी ओएस भी ऐप्लिकेशंस से भरपूर हैं। यानी यह फीचर आपके फोन का नहीं, उसके ऑपरेटिंग सिस्टम का होता है। हम आपको कुछ बेहद काम के फ्री-ऐप्लिकेशंस यानी मुफ्त में उपलब्ध ऐप्लिकेशंस के बारे में जानकारी देंगे।
कैसे करें डाउनलोड
हर स्मार्टफोन में उसके ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़े ऐप्लिकेशन स्टोर का लिंक होता है। इसे आप वाई-फाई, जीपीआरएस या एज से कनेक्ट कर सकते हैं। ऐप्लिकेशन भले ही फ्री हैं, लेकिन इसमें डाउनलोड करने पर डेटा यूसेज का खर्च आपको चुकाना पड़ सकता है। कई ऐप्लिकेशन ऐसे हैं, जो यूज होते हुए डेटा डाउनलोड करते हैं।
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Wednesday, July 14, 2010

दुनिया साइबर लॉ

दुनिया साइबर लॉ कीसाइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की चर्चा होते ही अंकित फाडिया का नाम सामने आ जाता है, जिन्होंने ओसामा बिन लादेन के लोगों द्वारा भेजे गए एक ई-मेल को डिकोड करने में सफलता हासिल की थी। आए दिन साइट हैकिंग से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड अथवा साइबर बुलिंग की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। यही है साइबर क्राइम और इन कामों को अंजाम देता है कम्प्यूटर तकनीक के जरिए एक हाइटेक अपराधी। इसे रोकने के लिए जरुरत होती है साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की।
साइबर क्राइम
पूरी दुनिया में साइबर स्पेस का अपना कानून है, जिसका उपयोग इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराधों से निपटने के लिए किया जाता है। इंटरनेट के जरिए जब किसी को ईमेल या मैसेज आदि से परेशान किया जाए, तो उसे साइबर बुलिंग कहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पचास फीसदी अमेरिकी किशोर किसी न किस रूप में साइबर बुलिंग के शिकार हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो इसका असर किसी को मारने पीटने से भी ज्यादा भयावह होता है।
कोर्स इस क्षेत्र में एक्सपर्ट बनने के लिए आपको पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स में से किसी एक कोर्स को करना जरूरी है। हालांकि कम संस्थानों में ही इसके लिए अलग से कोर्स उपलब्ध हैं। लेकिन अधिकतर संस्थानों में इससे संबंधित एक या दो सब्जेक्ट अवश्य पढाए जाते हैं। इस कोर्स के अंतर्गत साइबर लॉ और साइबर सिक्योरिटी से जुडी मूल बातें, नेटवर्क सुरक्षा, हमलों के प्रकार, नेटवर्क सिक्योरिटी के खतरे, हमले और खामियां, सुरक्षा संबंधी समाधान और उन्नत सुरक्षा प्रणाली आदि विशेष रूप से पढाए जाते हैं। इसके साथ ही संस्थान द्वारा विद्याíथयों के लिए एक डिजिटल लाइब्रेरी की भी व्यवस्था होती है, ताकि स्टूडेंट्स इससे जुडी अन्य जानकारी भी हासिल कर सकें। योग्यता
साइबर लॉ कोर्स में प्रवेश पाने के लिए कैंडिडेट को कम से कम 12वीं या स्नातक होना आवश्यक है। पहले से लॉ या आईटी की डिग्री हासिल कर चुके स्टूडेंट्स इसे अलग से भी पढ सकते हैं।
अवसर  आजकल सबसे ज्यादा केस साइबर क्राइम जैसे कि ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, ऑनलाइन परचेजिंग, ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, वेबसाइट बिगाडने आदि के दर्ज होते हैं। ऐसे में सरकारी, निजी, बैंकिंग सेक्टर, बीपीओ, आईबी, आईटी, शिक्षण-संस्थानों में इस तरह के क्राइम से निपटने के लिए साइबर लॉ एक्सप‌र्ट्स की जरूरत पडती है।
वेतन  तेजी से उभरते करियर के इस क्षेत्र में सैलरी पैकेज भी बहुत आकर्षक होती है। आरंभिक स्तर पर 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह तक मिल जाते हैं। यदि आप किसी कंपनी से न जुडकर फ्रीलांस काम करते हैं, तो एक्सप‌र्ट्स बनने के बाद मुंहमांगा वेतन मिल सकता है।
संस्थान  जागरण इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड मास कम्युनिकेशन, नोएडा

अंग्रेजी का आसमान

                                                         अंग्रेजी का आसमान
 आजकल बाजार के लिए सबसे अधिक शक्तिशाली भाषा अंग्रेजी ही है। यही कारण है कि यदि आपकी अंग्रेजी पर पकड है, तो देश-विदेश कहीं भी जाकर लोगों से कम्युनिकेट करने के साथ ही नौकरी भी कर सकते हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा भी कहा है।

नौकरी भी, पढाई भी अंग्रेजी भाषा और साहित्य का अध्ययन छात्रों में मूल्याकंन और विश्लेषण करने की क्षमता प्रदान करता है। इन दिनों लोगों में अंग्रेजी के प्रति काफी क्रेज है। यही वजह है कि अंग्रेजी बोलने और सीखने की ललक घर-घर में देखी जा सकती है। कुछ लोग स्पोकेन इंग्लिश का कोर्स चलाकर हजारों की कमाई भी कर रहे हैं। यदि आप स्वरोजगार करना चाहते हैं, तो अपने घर के आसपास कोचिंग खोलकर लोगों को अंग्रेजी बोलना और लिखना सिखा सकते हैं। इसके अलावा यदि आप कहीं नौकरी करते हैं, तो कोचिंग या ट्यूशन पढाकर भी कम समय में बेहतर पैसे कमा सकते हैं। लेकिन इस तरह के प्रोफेशन में आने के लिए जरूरी है कि आपकी अंग्रेजी ग्रामर पर पकड हो, क्योंकि ग्रामर भाषा की रीढ होती है। यदि इस पर कमांड है, तो आप इस प्रोफेशन में अवश्य सफल हो सकते हैं। अगर आप अंग्रेजी से ऑनर्स हैं, तो पार्ट टाइम ट्यूशन पढाकर भी पढाई के खर्च आसानी से निकाल सकते हैं।
प्रतियोगी परीक्षा में अहम
आजकल किसी भी परीक्षा में अंगे्रजी ज्ञान से संबंधित पेपर अवश्य होते हैं। यदि आईएएस या पीओ जैसी प्रतिष्ठित सेवा की बात करें, तो उसमें भी अंग्रेजी से संबंधित पेपर में पास करना अनिवार्य होता है। यदि आप इसमें निर्धारित अंक नहीं लाते हैं, तो आपके शेष पेपर का मूल्यांकन नहीं होता है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंग्रेजी का ज्ञान कितना जरूरी है। यदि आपकी इस विषय पर पकड है, तो इस विषय को लेकर आप मुख्य परीक्षा भी दे सकते हैं। इंटरव्यू में भी यदि आप अंग्रेजी बोलने और लिखने में सक्षम हैं, तो आपको काफी फायदा हो सकता है।
कैसे बनाएं पकड
अंग्रेजी भाषा पर बेहतर पकड व समझ बनाने के लिए बीए ऑनर्स या एमए करना आवश्यक है। इस कोर्स के माध्यम से अंग्रेजी के प्राचीन इतिहास , पॉलिटिकल थ्योरी, मध्यकालीन अंग्रेजी, विक्टोरियन साहित्य, आधुनिक और उत्तर आधुनिक साहित्य के अलावा नॉवेल, ड्रामा, क्रिटिकल थ्योरी और पोएट्री पढना होता है, जो कि काफी फायदेमंद होता है।
मीडिया अंग्रेजी के जानकार मीडिया में भी करियर संवार सकते हैं। यहां पर आपकी अलग-अलग भूमिकाएं हो सकती हैं, जैसे कि संवाददाता, संपादक, उपसंपादक, रिपोर्टर और कॉपीराइटर। प्रिंट मीडिया के तहत अंग्रेजी ऑनर्स का छात्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी काम कर सकते हैं। दुनिया में अलग-अलग जगहों पर ढेर सारी पत्र-पत्रिकाएं आए दिन अंग्रेजी में निकलती रहती हैं। आप वहां भी अपने लिए अवसर तलाश सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संभावना
स्कूल से लेकर कॉलेज व विश्वविद्यालय में शिक्षक तौर पर काम करने के अवसर भी आपके पास है। इस विषय से बीए ऑनर्स करने के बाद बीएड करके किसी भी सरकारी या गैर सरकारी स्कूल में शिक्षक बन सकते हैं। दूसरी तरफ एमए, एमफिल और पीएचडी करने के बाद किसी भी कॉलेज में लेक्चरर व प्रोफेसर बनने का अवसर भी आपके पास होता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी के जानकार के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों व स्कूलों में अध्ययन और अध्यापन के लिए काफी अवसर हैं।
बीपीओ की पहली पसंद
इस कोर्स से स्नातक करने के बाद आप एनजीओ, कॉरपोरेट सेक्टर, टूरिज्म, दूतावास,पब्लिकेशन , बिजनेस, टीवी , रेडियो ब्रॉडकास्िटग एडवरटाइजमेंट, बीपीओ, इंटरप्रेटर आदि की भूमिका बखूबी निभा सकते हैं। आज अंग्रेजी के जानकारों के लिए बीपीओ में काफी अवसर हैं। इस क्षेत्र में आने के लिए सिर्फ अंग्रेजी बोलना ही काफी है। इसमें डिग्री या डिप्लोमा कोई जरूरी नहीं है।

सॉफ्टवेयर के पारखी

सॉफ्टवेयर के पारखी
कंप्यूटरने दुनिया बदल दी है, तो इसमें नए-नए सॉफ्टवेयर्स का भी बडा हाथ है। सॉफ्टवेयर के बिना आज के मॉडर्न कंप्यूटर व‌र्ल्ड की कल्पना करना बेमानी ही होगा। सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग फर्म ओवम के मुताबिक, ग्लोबल सॉफ्टवेयर टेस्टिंग मार्केट वर्ष 2013 तक 56 अरब डॉलर का हो जाएगा। बढते मार्केट की वजह से सॉफ्टवेयर टेस्टिंग करियर के लिहाज से एक उम्दा क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।

क्या है सॉफ्टवेयर टेस्टिंग
जब सॉफ्टवेयर तैयार होता है, तो इसकी गुणवत्ता को परखने के लिए सॉफ्टवेयर टेस्टर की जरूरत होती है। दरअसल, सॉफ्टवेयर टेस्टर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की तरह ही एक अलग प्रोफेशन है। सॉफ्टवेयर के निर्माण और विकास से सॉफ्टवेयर टेस्टर का कुछ ज्यादा सरोकार नहीं होता है।
जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डेवलपर्स किसी सॉफ्टवेयर को तैयार कर लेते हैं, इसके बाद शुरू होता है सॉफ्टवेयर टेस्टर का काम। टेस्टर सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और उसकी स्टैबिलिटी को परखते हैं। आमतौर पर टेस्टिंग को दो हिस्सों में बांटा जाता है- मैनुअली टेस्टिंग और ऑटोमैटेड टेस्टिंग।
मैनुअली टेस्टिंग में टेस्टर सामान्य तौर पर ही किसी सॉफ्टवेयर की जांच करते हैं, लेकिन ऑटोमैटेड टेस्टिंग में टेस्टिंग टूल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत ब्लैक बॉक्स टेस्टिंग, व्हाइट बॉक्स टेस्टिंग, ग्रे बॉक्स टेस्टिंग, फंक्शनल टेस्टिंग, स्ट्रेस टेस्टिंग, लोड टेस्टिंग, स्मोक टेस्टिंग, सिस्टम टेस्टिंग, इंटीग्रेटेड टेस्टिंग और रीग्रेशन टेस्टिंग जैसे कार्य होते हैं।
क्यों अपनाएं यह करियर हाल के महीनों में आईटी कंपनियों की स्थिति बेहद अच्छी नहीं थी, बावजूद इसके सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के कारोबार में अच्छी-खासी तेजी देखी गई। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2010 तक टेस्टिंग सेवाओं का अंतरराष्ट्रीय मार्केट 13 अरब डॉलर का हो जाने की उम्मीद है। इसमें से 45 से 50 प्रतिशत काम भारत से आउटसोर्स किए जाने का अनुमान है।
जानकार कहते हैं कि भारत आउटसोर्स टेस्टिंग मार्केट का 70 प्रतिशत हिस्सा हासिल करने की क्षमता रखता है। इससे जाहिर है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के फील्ड में आने वाले दिनों में गतिविधियां और तेजी से बढेगी।
कोर्स ऐंड क्वालिफिकेशन
कंप्यूटर एजुकेशन देने वाले देश में प्रमुख संस्थान सॉफ्टवेयर टेस्टिंग में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स मुहैया कराते हैं। इसके अलावा, इंटरनेशनल सॉफ्टवेयर टेस्टिंग क्वालिफिकेशन बोर्ड द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कोर्स उपलब्ध है, जो देश के साथ-साथ विदेश में नौकरी दिलाने में सहायक होता है।
आमतौर पर सॉफ्टवेयर टेस्टिंग कोर्स में एडमिशन के लिए कई संस्थान बीएससी, बीसीए, एमएससी, बीई, बीटेक, एमई, एमटेक जैसी डिग्री की डिमांड करती है।
पर्सनल स्किल :- सॉफ्टवेयर टेस्टर को टेक्नोलॉजी के साथ-साथ बिजनेस की भी अच्छी समझ होनी चाहिए। ऐसा होने पर ही टेस्टर बेहतर और बारीकी से अपना काम कर सकेंगे। टेस्टर के लिए सभी आवश्यकताओं का ठीक तरह से आकलन अहम होता है। इसके बाद टेस्टिंग की कार्ययोजना तैयार करना, उनका क्रियान्वयन करना, दोष व खतरे को तलाशना, उनकी रिपोर्ट तैयार करना टेस्टर की ही जिम्मेवारी होती है। इतना ही नहीं, एप्लिकेशन से जुडे संभावित जोखिमों के बारे में आगाह करना भी टेस्टर का ही काम होता है।

जॉब का रोमांच
नैसकॉम के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों में 30 से 40 हजार लोगों को नौकरियां मिल सकती हैं। इससे साफ है कि इस इंडस्ट्री में फिर से रौनक लौट रही है। मैकिंजे ऐंड कंपनी द्वारा वर्ष 2020 तक की संभावनाओं पर जारी एक रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा तेजी, टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की आपूर्ति के दम पर भारतीय आईटी इंडस्ट्री का निर्यात कारोबार 2020 तक 178 अरब डॉलर का हो जाएगा। घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी 2020 तक 50 अरब डॉलर का हो जाएगा।
इस समय भारत की कई आईटी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अब नई भर्तियां करने की घोषणा की है। सॉफ्टवेयर कंपनियों की बात करें, तो इनमें टीसीएस, विप्रो, सत्यम, इन्फोसिस, कॉग्निजंट आदि प्रमुख हैं, जहां आप बेहतर करियर की उम्मीद कर सकते हैं।
इंस्टीट्यूट वॉच
रोमांचक है टेस्टिंग का काम
सॉफ्टवेयर के बढते उपयोग और कारोबार के कारण सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के क्षेत्र में काफी स्कोप देखा जा रहा है।
सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के प्रति पेशेवरों का नजरिया क्या है?
नए स्नातक आजकल टेस्टिंग में करियर बनाने को काफी उत्सुक नजर आने लगे हैं। यह एक बडा परिवर्तन है। इंटरनेट की बदौलत आज सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन कहीं ज्यादा लोगों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे हैं। ऐसे में बिजनेस की सफलता काफी हद तक इन एप्लिकेशन की गुणवत्ता और कार्यक्षमता पर निर्भर करती है।
कितना रोमांचक है यह काम?
सॉफ्टवेयर में दोष ढूंढने का काम काफी रोमांच भरा होता है। इस क्षेत्र में कामयाब होने के लिए एक सकारात्मक रवैया, पैनी नजर और जोश जरूरी है।
क्या भारतीय सॉफ्टवेयर टेस्टर्स अंतरराष्ट्रीय दर्जे के होतेहैं?
टेस्टिंग सेवाओं की आउटसोर्सिग के क्षेत्र में भारत अग्रणी है। यहां का टेस्टिंग मार्केट आकार के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय मार्केट की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ रहा है। जिस तरह हमारे टेस्टर्स ऊंचे से ऊंचे दर्जे के, जटिल से जटिल सिस्टम्स को सफलता से टेस्ट कर रहे हैं, उसे देखकर यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि भारतीय टेस्टर किसी से भी कम नहीं।
टेस्टिंग एक कला है या विज्ञान?
सॉफ्टवेयर टेस्टिंग आज एक स्वतंत्र विधा बन चुकी है। यह टेक्नोलॉजी और बिजनेस ज्ञान के मिश्रण से बनी विधा है। उस लिहाज से देखें, तो इसमें कला भी है, विज्ञान और इंजीनियरी भी। आज करियर के लिहाज से इस क्षेत्र में काफी अच्छी संभावनाएं हैं।

ब्यूटी बिजनेस

ब्यूटी बिजनेस
बदलती लाइफस्टाइल में हर कोई सुंदर और स्मार्ट दिखना चाहता है। खूबसूरत दिखने की चाह में लोग अधिक पैसे खर्च करने से भी परहेज नहीं करते। यही वजह है कि भारत में आज ब्यूटी ऐंड वेलनेस इंडस्ट्री तेजी से फल-फूल रही है। इस बारे में अन्‌र्स्ट ऐंड यंग और फिक्की की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में ब्यूटी बिजनेस का व‌र्ल्ड मार्केट लगभग 11 हजार करोड रुपये का है। मार्केट एक्सप‌र्ट्स का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षो में यह इंडस्ट्री 30-35 प्रतिशत की दर से ग्रो करेगी। भारतीय कॉस्मेटिक बाजार की बात करें, तो यह लगभग 4,580 करोड रुपये का हो गया है।

करियर विद फैशन
कुछ वर्ष पहले तक ब्यूटी इंडस्ट्री, ब्यूटी सैलून या इससे जुडी एक्टिविटीज तक ही सीमित थी, लेकिन प्राय: हर आदमी में सुंदर दिखने की चाहत ने इस इंडस्ट्री को बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। खास बात यह भी है कि महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी सुंदर दिखने की यह चाहत मेट्रो शहरों के अलावा छोटे-छोटे शहरों में भी दिखने लगी है। यही कारण है कि इन दिनों इसमें आमदनी अधिक होने और मार्केट में ज्यादा एक्सपोजर मिलने के कारण यह संभावनाओं वाला करियर साबित हो रहा है। कंज्यूमर की भारी डिमांड को देखते हुए ही कई घरेलू और विदेशी कंपनियां इंडिया में अपना बिजनेस आरंभ कर रही हैं। रेवलॉन के मार्केटिंग एक्सपर्ट दीपक भंडारी के अनुसार, इंडियन ब्यूटी मार्केट अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए आने वाले समय में इसमें करियर ग्रोथ अपार संभावनाएं हैं। वीएलसीसी की फाउंडर वंदना लूथरा कहती हैं कि यह उद्योग फेयरनेस, हेल्दी स्किन क्रीम से आगे बढकर ब्यूटी सैलून, स्पा और जिम तक जा पहुंचा है। सबसे बडी बात तो यह है कि ब्यूटी इंडस्ट्री अब केवल मेट्रो सिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी इसने पांव फैलाने शुरू कर दिए हैं। इसलिए ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मांग छोटे और बडे शहरों में बराबर है। दीपक भंडारी कहते हैं कि कंज्यूमर तक पहुंच बनाने के लिए व्यवसायियों को बडी संख्या में ब्रांड वैल्यू के प्रति जागरूक करना होगा। यह सच है कि कुछ वर्ष पहले तक ब्यूटी बिजनेस को लोग कुछ खास अच्छी निगाह से नहीं देखते थे। अब इस क्षेत्र में बडे नाम वंदना लूथरा, ब्लॉसम कोच्चर, शहनाज हुसैन जैसे जाने-माने नामों जुड जाने के कारण यह सेक्टर अब सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है। ऐसे में इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवा जरूरी ट्रेनिंग लेकर किसी मशहूर ब्यूटी चेन में जॉब कर सकते हैं या फिर कम पूंजी में ही खुद का ब्यूटी सेंटर खोल सकते हैं।
पर्सनल स्किल
ब्यूटी बिजनेस में आपको दिन भर में कई कस्टमर्स से मिलना-जुलना पडता है। यदि आप उनसे विनम्रता से और मुस्कुराकर बात नहीं करेंगे या प्रोडक्ट्स के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाएंगे, तो इस क्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। ब्यूटी विशेषज्ञ शहनाज हुसैन मानती हैं कि इस व्यवसाय में आगे बढने के लिए अच्छी कम्युनिकेशन स्किल और सॉफ्ट लैंग्वेज होना बहुत जरूरी है। साथ ही, आपको ब्यूटी ट्रेंड के प्रति रुचि और जानकारी भी होनी चाहिए। चूंकि फैशन की दुनिया में स्टाइल और ट्रेंड हर दिन बदलते रहते हैं, इसलिए आपको नई तकनीक, हेयरस्टाइल्स, मेकअप और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के बारे में अपडेट रहना होगा। एंटरप्रेन्योर बनने के लिए हमेशा कुछ नया सीखने की प्रवृत्ति और हार्ड वर्किग बहुत जरूरी है। इसमें एंट्री बारहवीं के बाद की जा सकती है, लेकिन यदि आप कम से कम ग्रेजुएट हैं, तो कामयाबी के चांसेज और बढ जाते हैं।
कोर्स
ब्यूटी बिजनेस में जॉब करने या एंटरप्रेन्योर बनने के लिए आप उपलब्ध तीन से छह महीने के शॉर्टटर्म कोर्स भी कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसे कोर्स ब्यूटी चेन चलाने वाली जानी-मानी कंपनियों द्वारा चलाए जाते हैं। ऐसे कुछ प्रमुख कोर्सो के नाम इस प्रकार हैं :
एडवांस्ड डिप्लोमा इन कॉस्मेटोलॉजी
डिप्लोमा इन ब्यूटी कल्चर
सर्टिफिकेट कोर्स इन स्किन केयर
ऑप्शंस की भरमार
इस क्षेत्र में जरूरी कोर्स करने के बाद आपके पास कई ऑप्शंस मौजूद होते हैं। इनमें से किसी एक का चुनाव कर अपने पसंदीदा क्षेत्र में खूबसूरती के साथ करियर बनाया जा सकता है। ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं : सैलून ओनर, सैलून चेन मैनेजमेंट, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ब्यूटीकेयर, पीआर स्पेशलिस्ट, मैन्युफेक्चरर, सेल्स रिपे्रजेंटेटिव, फैशन स्टाइलिस्ट, ब्यूटी मैग्जीन राइटर, स्कूल इंस्ट्रक्टर, ब्यूटीकेयर डिस्ट्रीब्यूटर, रिसर्च केमिस्ट, ब्यूटी प्रोडक्ट डिजाइनर, ब्यूटी बिजनेस कंसल्टेंट, ट्रेड शो डायरेक्टर, ब्यूटी स्कूल ओनर आदि।
आकर्षक सैलरी
किसी ब्यूटी सैलून या सेंटर में जॉब की शुरुात में आपकी स्टार्टिग सैलरी 2.3-6 लाख रुपये प्रतिवर्ष हो सकती है। इस क्षेत्र में दो तरह से शुरुआत की जा सकती है। आप या तो अपना खुद का व्यवसाय कर सकते हैं या किसी एक्सपर्ट के असिस्टेंट भी बन सकते हैं। यदि आप पॉपुलर एंटरप्रेन्योर हैं, तो आपकी कमाई लाखों में हो सकती है। वहीं आप यदि असिस्टेंट के रूप में काम शुरू करते हैं, तो शुरुआती सैलरी प्रतिमाह 15-30 हजार रुपये तक हो सकती है।
सेलेक्शन सोच समझकर
कई बार हम मात्र कमाई या बडे नाम के आकर्षण की वजह से गलत करियर का चुनाव कर लेते हैं। यदि आप सजने-सजाने के शौकीन हैं, तभी इस करियर का चुनाव करें। कभी भी दूसरों की सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान न दें। इससे आप न केवल परेशान हो सकते हैं, बल्कि अपने काम को भी ठीक ढंग से अंजाम नहीं दे सकते। वंदना लूथरा कहती हैं कि जब मैंने इस व्यवसाय की शुरुआत की थी, तो मेरे आसपास रहने वाले लोग इसे न केवल कम करके आंकते थे, बल्कि इसे प्रोफेशन कम, अपना शौक पूरा करने का साधन अधिक मानते थे। यदि आपने इस क्षेत्र में करियर बनाने का मन बना लिया है, तो फिर परेशान होने की बजाय अपने काम पर ध्यान दें, क्योंकि इस सेक्टर में अपॉरच्युनिटी की कोई सीमा नहीं है।
प्रोफेशनल नॉलेज
ब्यूटी बिजनेस कई क्षेत्रों में बंटा हुआ है। आप यदि इस प्रोफेशन में शिखर पर जाना चाहते हैं, तो प्रोफेशनल नॉलेज बहुत जरूरी है। इसके लिए समुचित प्रशिक्षण अनिवार्य है। डिप्लोमा कोर्स करने के बाद आप एडवांस लेवल पर किसी एक क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं। चूंकि यह पूरी तरह से फैशन और स्टाइल से जुडा क्षेत्र है, इसलिए आपको देश और दुनिया के बदलते फैशन पर भी लगातार नजर रखते हुए खुद को अपडेट करते रहना होगा।
ब्यूटी इंस्टीट्यूट्स
शहनाज हर्बल इंटरनेशनल ब्यूटी एकेडमी, नई दिल्ली और मुंबई
www.shahnazinstitute.in
वीएलसीसी इंस्टीट्यूट्स, फ्रेंचाइजी एक्रॉस इंडिया
www.vlccinstitute.com
हबीब हेयर एकेडमी, फ्रेंचाइजी एक्रॉस इंडिया
www.jawedhabib.co.in
स्नेल हंस ब्यूटी स्कूल, मुंबई
http://www.rbcsgroup.com/
डॉ. धर्माबल गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक फॉर वूमन, चेन्नई
www.drdgpcw.org
वूमंस टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, वाईडब्ल्यूसीए, नई दिल्ली
www.ywcaindia.org
आईटीजी
ब्यूटी की पब्लिसिटी
ब्यूटी बिजनेस में खुद को जमाने और आगे बढाने के लिए पब्लिसिटी जरूरी है। इस इंडस्ट्री में कामयाबी पाने के गुर बता रही हैं जानी-मानी ब्यूटीशियन शहनाज हुसैन..
इंडस्ट्री में बूम की वजह क्या है?
इन दिनों महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में ब्यूटी कॉन्शसनेस बढी है। दरअसल, इससे न केवल ब्यूटी ट्रीटमेंट मिलती है, बल्कि रिलैक्सेशन और आत्मविश्वास भी बढता है। यही कारण है कि आज के युवा इस क्षेत्र में करियर बनाने में खूब दिलचस्पी ले रहे हैं।
इस फील्ड के चैलेंज क्या हैं?
वर्ष 1971 में मैंने भारत में हर्बल केयर इंट्रोड्यूस किया था। मेरे सामने नेचुरल केयर के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने का चैलेंज था। दूसरे, मुझे इंटरनेशनल मार्केट में एंट्री पानी थी, जिसके लिए मुझे अथक परिश्रम करना पडा। इस क्षेत्र में स्थापित होने के लिए आपको न्यू ट्रेंड्स और तकनीक की जानकारी रखना बहुत जरूर है।
क्या देश-विदेश में अच्छी तरह स्थापित होने के लिए व्यवसाय की पब्लिसिटी जरूरी है?
मैंने वर्ष 1980 में लंदन के फेस्टिवल ऑफ इंडिया में भाग लिया था। बिना किसी विज्ञापन और आर्थिक मदद के विदेश में भारतीय सामान बेचना आसान काम नहीं था। आश्चर्य की बात यह हुई कि तीन दिन में ही मेरे सभी प्रोडक्ट्स बिक गए। कहने का मतलब यह है कि यदि आप बढिया माल तैयार करते हैं या औरों से अच्छा काम करते हैं, तो आपको आगे बढने से कोई नहीं रोक सकता है लेकिन बाजार की प्रतिस्पद्र्धा में खुद को बनाए रखने के लिए पब्लिसिटी जरूरी है।